1947 में देश के बंटवारे के साथ ही दो देश बन गये। पाकिस्तान ने कहा कि वह एक इस्लामिक राष्ट्र बनेगा और भारत ने एक लोकतांत्रिक सेकुलर देश बनने का फैसला किया।जो नागरिक इधर ऊधर जाना चाहते थे वह जा सकते थे लेकिन जो लोग पहले से पाकिस्तानी भूखंड में रहते थे और खासकर गैर मुस्लिम, उन्होंने कभी भी बंटवारा नही मांगा था।वह इस भयावह फैसले के शिकार बन गये।
एक इस्लामिक पाकिस्तान में उनका जीना दुभर हो गया। उनके आगे केवल दो रास्ते बचे, धर्म परिवर्तन या फिर कभी न खत्म होने वाला अत्याचार।यह दरिंदगी पाकिस्तान में बढ़ती ही चली गयी और गैर मुस्लिम 23 से 3 प्रतिशत रह गये।
कुछ भागकर भारत आ गये और भारत में आने के बाद उस जुल्म से तो बच गये पर यहां भी बिना नागरिकता के वह एक नारकीय जीवन जीने को मजबूर थे।
ऐसे पीड़ित और शोषित लोगों को CAA के द्ववारा नागरिकता देकर भारत सरकार उन पर कोई एहसान नही कर रही है बल्कि भूतकाल में लिये गये एक भयावह और बेहद गलत फैसले का पश्चाताप भी है।